|
|
|
| Abstract : |
| मानवाधिकार की धारणा उतनी ही पुरानी है, जितना की मानव इतिहास और उतना ही विस्तीर्ण है जितना सामाजिक जीवन| यह एक ऐसी अवधारणा या विचार है, जिसमें बदलती हुई परिस्थितियों और समय के साथ विभिन्न प्रकार के परिवर्तन होते रहे हैं, उसके उपरान्त भी मानवाधिकारों की विचारधारा से कोई देश या समाज असहमत नहीं हो सकता है| |
| If you want to review this article please contact us at ayisrj2011@gmail.com |